2026 का कैलेंडर दीवार पर लग चुका है, लेकिन आम आदमी की ज़िंदगी की पुरानी परेशानियां—महंगाई, EMI का बोझ और घर का खर्च—आज भी वहीं खड़ी हैं।
ऐसे में, पूरे देश की नज़रें उम्मीद भरी निगाहों से 1 फरवरी की तारीख पर टिकी हैं। जी हाँ, हम बात कर रहे हैं Union Budget 2026 (आम बजट 2026) की, जो सिर्फ एक बही-खाता नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों के लिए उम्मीद की एक किरण है।
आज हर मिडिल क्लास परिवार यही सोच रहा है— “राशन महंगा हो गया, पेट्रोल के दाम कम नहीं हुए और बच्चों की फीस बढ़ती जा रही है, लेकिन सैलरी वहीं की वहीं है।” ऐसे माहौल में, क्या वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) अपने ‘लाल बैग’ से इस बार कोई जादू निकालेंगी?
क्या इस बार हमें Income Tax के पुराने जाल से आज़ादी मिलेगी? क्या अन्नदाता किसान की जेब में सम्मान निधि के कुछ और पैसे आएंगे? या फिर रेलवे के जनरल डिब्बों में सफर करने वाले आम यात्री को भीड़ से राहत मिलेगी?
‘रसोई’ पर असर डालते हैं।
इसलिए, इस रिपोर्ट में हम भारी-भरकम और जटिल मुद्दों को छोड़कर, सिर्फ उन 3 मुख्य मुद्दों (Top 3 Issues) पर फोकस करेंगे जो आपसे और हमसे जुड़े हैं— इनकम टैक्स, किसान और रेलवे।
Union Budget 2026 आपकी ‘जेब‘ और ‘रसोई‘ का क्या होगा हाल? इन उम्मीदों का ‘एक्स-रे’ (X-Ray) करते हैं:
अगर आपके मन में भी ये सवाल उमड़ रहे हैं, तो आप बिल्कुल सही जगह पर हैं। आज हम आम बजट 2026 से जुड़ी हर उस उम्मीद (Expectations) और संभावना का विश्लेषण करेंगे, जिसका सीधा असर आपकी रसोई और आपकी जेब पर पड़ने वाला है।
उम्मीदों की बात करने से पहले आपको बता दें कि दिल्ली में सियासी हलचल शुरू हो चुकी है। 28 जनवरी से संसद का आम बजट 2026 सत्र (Budget Session) शुरू हो गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण के साथ सदन की कार्यवाही शुरू हुई।
पूरा बजट शेड्यूल:
- 28 जनवरी: बजट सत्र का आगाज (शुरू हो चुका है)।
- 31 जनवरी (शनिवार): आर्थिक सर्वेक्षण (Economic Survey) पेश किया जाएगा।
- 1 फरवरी (रविवार): बजट का महा-दिन, सुबह 11 बजे बजट पेश होगा।
खास बात: हाल के वर्षों में बहुत कम देखा गया है जब केंद्रीय बजट रविवार (छुट्टी के दिन) पेश किया जाएगा।
क्या आप जानते हैं? (बजट सत्र का इंटरवल)
- पहला चरण: 28 जनवरी से 13 फरवरी तक
- दूसरा चरण: 9 मार्च से 2 अप्रैल तक
बीच में छुट्टी क्यों?
13 फरवरी से 9 मार्च के बीच संसद इसलिए बंद रहती है ताकि संसदीय कमेटियां (Parliamentary Committees) सरकार द्वारा मांगे गए पैसों की बारीकी से जांच कर सकें। यानी यह देखा जाता है कि बजट की मांगें सही हैं या नहीं।
अगर आपके मन में भी ये सवाल उमड़ रहे हैं, तो आप बिल्कुल सही जगह पर हैं। आज हम Union Budget 2026 से जुड़ी हर उस उम्मीद (Expectations) और संभावना का विश्लेषण करेंगे, जिसका सीधा असर आपकी रसोई और आपकी जेब पर पड़ने वाला है।
Income Tax Slab 2026 Expected Changes: क्या मिडिल क्लास को मिलेगी ‘बड़ी राहत’?

सबसे पहले बात उस मुद्दे की, जो सीधा आपकी और हमारी जेब पर डाका डालता है— Income Tax।
दोस्तों, एक मिडिल क्लास (Middle Class) इंसान की जिंदगी की कड़वी सच्चाई यही है कि “सैलरी का मैसेज तो महीने की 1 तारीख को आता है, लेकिन 10 तारीख तक EMI, बच्चों की स्कूल फीस और घर के खर्चों में जेब खाली हो जाती है।”
महंगाई (Inflation) इतनी बढ़ चुकी है कि 500 रुपये का नोट अब सब्जी मंडी में खुल्ले पैसे की तरह गायब हो जाता है। ऊपर से जब बची-कुची कमाई पर भारी-भरकम TDS कटता है, तो मन में एक ही सवाल आता है— “आखिर हमारे हाथ में बचेगा क्या?”
इसी दर्द को कम करने के लिए पूरा देश Union Budget 2026 की ओर उम्मीद भरी नज़रों से देख रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चुनावी साल के बाद सरकार नौकरीपेशा लोगों के आंसुओं को पोंछने के लिए New Tax Regime में ये दो ऐतिहासिक बदलाव कर सकती है:
- मूल छूट (Basic Exemption) बढ़ेगी? आज के दौर में 3 लाख रुपये सालाना कमाई ऊँट के मुंह में जीरे के समान है। अभी 3 लाख रुपये तक की आय पर कोई टैक्स नहीं लगता। उम्मीद जताई जा रही है कि बढ़ती महंगाई को देखते हुए इस लिमिट को बढ़ाकर 5 लाख रुपये किया जा सकता है।
- 7 लाख वाली लिमिट का क्या होगा? अभी 7 लाख रुपये तक की आय पर रिबेट (Rebate) मिलती है, यानी कोई टैक्स नहीं देना पड़ता। लेकिन मेट्रो शहरों में 7 लाख कमाने वाला भी संघर्ष कर रहा है। चर्चा ज़ोरों पर है कि सरकार इस लिमिट को बढ़ाकर 8 से 9 लाख रुपये कर सकती है, ताकि मिडिल क्लास के हाथ में खर्च करने के लिए ज्यादा पैसा बचे।
हमारा सवाल आपसे: एक मेट्रो सिटी में रहने वाले परिवार के लिए आपके हिसाब से कितने लाख तक की कमाई टैक्स फ्री (Tax Free) होनी चाहिए? 7 लाख, 10 लाख या उससे ज्यादा? नीचे कमेंट में अपनी राय जरूर लिखें, क्योंकि आपकी आवाज़ मायने रखती है!
अक्सर हम ‘3 लाख’ और ‘7 लाख’ के आंकड़ों में उलझ जाते हैं। आइए इसे बिल्कुल आसान भाषा में समझते हैं:
1. Tax Slab (3 लाख):
इसे आप ‘शुरुआती छूट’ मानिये। यह वह लक्ष्मण रेखा है जहाँ से टैक्स का मीटर चालू होता है। इसका फायदा सबको मिलता है —
चाहे आप 5 लाख कमाएं या 5 करोड़।
2. Tax Rebate (7 लाख):
यह सरकार की तरफ से दिया गया एक ‘स्पेशल डिस्काउंट कूपन’ है।
- अगर आपकी कुल सालाना कमाई 7 लाख रुपये तक है, तो जो भी टैक्स बनेगा, उसे सरकार माफ (Rebate) कर देगी।
- लेकिन अगर आपकी कमाई 7 लाख से 1 रुपया भी ज्यादा हो गई, तो यह डिस्काउंट कूपन कैंसिल हो जाएगा और पूरे नियमों के अनुसार टैक्स देना पड़ेगा।
PM Kisan Samman Nidhi Budget 2026: क्या ‘अन्नदाता’ की झोली में आएगा बंपर गिफ्ट?

अब शहर की भागदौड़ से निकलकर गाँव की पगडंडियों की ओर चलते हैं। हमारे देश का किसान (Annadata), जो सर्दी-गर्मी देखे बिना खेत में पसीना बहाता है, आज महंगाई की सबसे बड़ी मार झेल रहा है।
सच्चाई यह है कि खेती अब पहले जैसी सस्ती नहीं रही। डीजल के दाम आसमान छू रहे हैं, DAP और यूरिया की एक बोरी खरीदने के लिए लंबी लाइनों में लगना पड़ता है, और उन्नत बीज (Seeds) की कीमत सुनकर पसीना आ जाता है। ऐसे हालात में, सरकार की तरफ से मिलने वाली 6,000 रुपये सालाना की मदद अब “ऊंट के मुंह में जीरे” जैसी लगने लगी है।
किसान भाइयों का कहना है कि 4 महीने में मिलने वाली 2,000 रुपये की किश्त से अब खेत की जुताई का खर्चा भी मुश्किल से निकलता है। इसी दर्द को समझते हुए, Union Budget 2026 से गाँवों को बहुत बड़ी आस है।
सूत्रों (Sources) और कृषि विशेषज्ञों की मानें तो सरकार इस आम बजट 2026 में किसानों के चेहरों पर मुस्कान लाने के लिए PM Kisan Samman Nidhi Budget 2026 की राशि में 50% तक की बढ़ोतरी कर सकती है।
- कितनी बढ़ सकती है राशि? महंगाई दर (Inflation) को देखते हुए, सालाना मदद को 6,000 रुपये से बढ़ाकर 9,000 रुपये किया जा सकता है। यानी हर 4 महीने पर मिलने वाली किश्त 2,000 से बढ़कर 3,000 रुपये हो सकती है।
- कब होगा ऐलान? वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अपने बजट भाषण के दौरान यह “मास्टरस्ट्रोक” खेल सकती हैं। अगर यह ऐलान होता है, तो यह सिर्फ एक नंबर नहीं होगा, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था (Rural Economy) के लिए एक ‘संजीवनी बूटी‘ साबित होगा।
सवाल: क्या आपको लगता है कि बढ़ती महंगाई में 9,000 रुपये काफी होंगे, या इसे बढ़ाकर 12,000 रुपये (1000 महीना) करना चाहिए? अपनी राय कमेंट में जरूर लिखें।
Railway Budget 2026: क्या सिर्फ ‘वंदे भारत’ दौड़ेगी या आम आदमी की ट्रेन भी चलेगी?

अब बात उस ‘लाइफलाइन’ की, जो कश्मीर से कन्याकुमारी तक हम सबको जोड़ती है— भारतीय रेलवे।
लेकिन पिछले कुछ सालों में रेलवे की तस्वीर दो हिस्सों में बंट गई है। एक तरफ Vande Bharat जैसी चमचमाती ट्रेनें हैं, जो गर्व का विषय हैं। वहीं दूसरी तरफ जनरल बोगियों (General Coaches) की वो डरावनी तस्वीरें हैं, जहाँ इंसानों को बोरियों की तरह एक-दूसरे पर गिरकर सफर करना पड़ता है।
असली सफर, असली पीड़ा: आज एक आम मजदूर, छोटा व्यापारी या परीक्षा देने जाने वाला छात्र जब स्टेशन पहुँचता है, तो उसे ट्रेन में चढ़ने के लिए जंग लड़नी पड़ती है। स्लीपर क्लास (Sleeper Class) में भी पैर रखने की जगह नहीं है और ‘कन्फर्म टिकट’ मिलना लॉटरी जीतने जैसा हो गया है। आम जनता के मन में बस एक ही शिकायत है— “सरकार का सारा ध्यान महंगी ट्रेनों पर है, गरीब आदमी की पैसेंजर ट्रेनें कम क्यों हो रही हैं?”
इसी नाज़ुक हालात को संभालने के लिए Railway Budget 2026 में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से बहुत बड़ी उम्मीदें हैं:
- 3,000-4,000 नए जनरल कोच का ऐलान: सूत्रों के मुताबिक, जनरल डिब्बों की भारी भीड़ को देखते हुए सरकार इस बजट में 3,000 से ज्यादा नए नॉन-एसी (Non-AC) कोच बनाने का ऐलान कर सकती है। यह फैसला उन करोड़ों यात्रियों के लिए राहत की सांस होगा जो महँगा टिकट नहीं खरीद सकते।
- Vande Bharat Sleeper (वंदे भारत स्लीपर): लंबी दूरी के यात्रियों के लिए सरकार Vande Bharat Sleeper वर्जन लॉन्च करने का रोडमैप पेश कर सकती है। यह राजधानी एक्सप्रेस से बेहतर सुविधाओं के साथ आएगी, लेकिन इसका किराया क्या होगा, इस पर सबकी नज़र रहेगी।
- सुरक्षा कवच (Safety First): बीते दिनों हुए रेल हादसों ने सबके रोंगटे खड़े कर दिए थे। उम्मीद है कि इस बजट में ‘कवच सिस्टम’ (Kavach Safety System) का दायरा बढ़ाने के लिए फंड डबल किया जा सकता है, ताकि आपका और हमारा सफर सुरक्षित रहे।
जनता का सवाल: सरकार को किस पर ज्यादा फोकस करना चाहिए— नई ‘वंदे भारत’ चलाने पर या पुरानी ट्रेनों में ‘जनरल डिब्बे’ बढ़ाने पर? अपनी बेबाक राय कमेंट में जरूर लिखें।
आम बजट 2026 से उम्मीदें: यह सिर्फ ‘आंकड़ों‘ का खेल नहीं, हमारी ‘उम्मीदों‘ का बजट है
दोस्तों, बजट (आम बजट 2026 ) को अक्सर लोग भारी-भरकम शब्दों और मुश्किल गणित का खेल समझते हैं। टीवी चैनल वाले बड़े-बड़े ग्राफिक्स दिखाएंगे और एक्सपर्ट्स GDP की बातें करेंगे।
लेकिन, सच कहें तो एक आम आदमी के लिए बजट का मतलब GDP नहीं, बल्कि उसकी ‘जेब‘ होती है। जब हम बाज़ार जाते हैं, तो यह नहीं देखते कि देश की इकोनॉमी (Economy) कहाँ जा रही है; हम यह देखते हैं कि आटे का पैकेट 10 रुपये महँगा हुआ या सस्ता? एक पिता यह देखता है कि बच्चों की स्कूल फीस भरने के बाद उसके पास कुछ बच रहा है या नहीं। एक गृहिणी (Housewife) यह देखती है कि गैस सिलेंडर के दाम कम हुए या नहीं।
आम बजट 2026 इसलिए खास है क्योंकि हम सब एक ऐसे दौर से गुजर रहे हैं जहाँ कमाई तो बढ़ रही है, लेकिन खर्चा उससे दोगुनी रफ़्तार से भाग रहा है।
चाहे वो इनकम टैक्स (Income Tax) में छूट की आस लगाए बैठा सैलरी वाला बाबू हो, सम्मान निधि का इंतज़ार करता किसान हो, या जनरल बोगी में धक्के खाता यात्री—हम सब एक ही उम्मीद के धागे से जुड़े हैं कि “शायद इस बार सरकार हमारी सुनेगी।”

Budget 2026 Live Updates: 1 फरवरी को यहाँ देखें लाइव, सजेगा ‘बजट का महाकुंभ’
दोस्तों, ये तो थीं उम्मीदें और कयास। लेकिन असली तस्वीर 1 फरवरी को सुबह 11 बजे साफ होगी।
आप कहीं मत जाइयेगा! इसी पेज पर 1 फरवरी को हम आपके लिए संसद से सीधा लाइव अपडेट (Budget 2026 Live Updates) लेकर आएंगे। वित्त मंत्री के भाषण की पल-पल की अपडेट आपको इसी आर्टिकल में नीचे मिलती रहेगी।
(Note: जैसे ही भाषण शुरू होगा, लाइव वीडियो और टेक्स्ट अपडेट यहाँ जोड़े जाएंगे। पेज को बुकमार्क कर लें!)
अब बारी आपकी है:
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दिल पर हाथ रखकर बताइये, इस बजट से आपकी सबसे बड़ी ‘विश लिस्ट‘ (Wishlist) क्या है?
- क्या आप चाहते हैं कि पेट्रोल-डीजल को GST में लाया जाए?
- क्या बुजुर्गों के लिए रेल किराए में छूट वापस शुरू होनी चाहिए?
- या फिर रोजगार (Jobs) ही सबसे बड़ा मुद्दा होना चाहिए?
नीचे Comment Box खुला है। अपनी सुझाव देना हो, बेझिझक लिखें। हम (मैं) खुद आपके हर कमेंट को पढ़ूँगा। यह चर्चा यहीं ख़त्म नहीं होगी। असली एक्शन तो 1 फरवरी, सुबह 11 बजे शुरू होगा। तो चलिए, मिलते हैं 1 फरवरी को, उम्मीदों के इस नए सवेरे के साथ!
(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स और विशेषज्ञों के अनुमानों पर आधारित है। अंतिम निर्णय 1 फरवरी को बजट भाषण में ही पता चलेगा। Images used in this article are for representational purposes only)
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