Deep Ocean Mission: Sea Mission के तहत भारत ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। Deep Ocean Mission और India Samudrayaan की तैयारी के हिस्से के रूप में भारतीय समुद्र यात्रियों ने Deep Sea Dive Mission में अटलांटिक महासागर की गहराई में 4,025 मीटर और 5,002 मीटर तक गोता लगाया। इस सफलता ने भारत को उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल कर दिया है, जिन्होंने इंसानों को समुद्र की इतनी गहराई तक भेजा है, मानो ये “Indian in the Ocean” हों जो समुद्र के अज्ञात रहस्यों को खोज रहे हों।
भारत ने इतिहास रचते हुए दो aquanauts (समुद्र यात्री) को अटलांटिक महासागर में हजारो मीटर की गहराई तक भेजने में सफलता पाई। यह देश की गहराई में सबसे बड़ी मानवयुक्त गोता उपलब्धि है और इसके पीछे राष्ट्रीय संस्थान NIOT (National Institute of Ocean Technology) और फ्रांस के IFREMER के सहयोग का हाथ है।
Deep Ocean Mission: भारतीय वैज्ञानिक और नौसेना कमांडर के द्वारा अटलांटिक महासागर में 4,025 और 5,002 मीटर की गहराई तक पहुंचने में पायी गयी सफलता।
भारत ने इतिहास रचते हुए दो aquanauts (समुद्र यात्री) को अटलांटिक महासागर (Deep Sea Mission India) में हजारो मीटर की गहराई तक भेजने में सफलता पाई। यह देश की गहराई में सबसे बड़ी मानवयुक्त गोता उपलब्धि है और इसके पीछे राष्ट्रीय संस्थान NIOT (National Institute of Ocean Technology) और फ्रांस के IFREMER के सहयोग का हाथ है।

Deep Ocean Mission:गोता एवं मिशन की रूपरेखा
5 और 6 अगस्त 2025 को, NIOT की टीम ने फ्रांसीसी उपसतहयान (submersible) “Nautile” का उपयोग करते हुए समुंदर की गहराई (Deep Sea Dive Mission) में मानव मिशन का अभ्यास किया ।
5 अगस्त: Raju Ramesh ने 4,025 मीटर की गहराई तक गोता लगाया।
6 अगस्त: रिटायर्ड कमांडर (Cdr.) Jatinder Pal Singh ने 5,002 मीटर की गहराई हासिल की, जो कि भारत का अब तक का सबसे गहरा मानवयुक्त गोता है।
मिशन की अवधि लगभग 7 से 9.5 घंटे रही, जिसमें गोता लगाने, काम करने और सतह पर लौटने का समय शामिल था । गोता लगाते समय दोनों aquanauts ने रोबोटिक हत्थे (manipulator arms), जीवन समर्थन प्रणालियों, संचार तकनीक, व् सैंपल संग्रहण जैसे कार्यों में शामिल अनुभव प्राप्त किया ।
Deep Ocean Mission: इस मिशन का महत्व और भविष्य की दिशा
1. Samudrayaan – भारत का गहरा महासागर मिशन(India Samudrayaan)
यह उपलब्धि भारत के Deep Ocean Mission यानी Samudrayaan परियोजना की तैयारी का हिस्सा है। इस मिशन के तहत भारत Matsya-6000 नामक स्वदेशी मानवयुक्त उपसतहयान (submersible) विकसित कर रहा है, जो 6,000 मीटर की गहराई तक तीन लोगों को ले जा सकेगा और उसका लक्ष्य दिसंबर 2027 तक इस गहराई पर मानव मिशन करना है ।
2. नीतिगत और आर्थिक महत्व
केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री Dr. Jitendra Singh ने इस उपलब्धि को उच्च दर्जे का विज्ञान-तकनीकी प्रयास बताते हुए कहा कि अब भारत उन कुछ चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है, जिन्होंने इतनी गहराई तक मानव मोर्चा भेजा है ।
उन्होंने यह भी जोड़ा कि स्वतंत्रता दिवस के भाषणों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मिशन और नीले अर्थव्यवस्था (Blue Economy) को विशेष महत्व दिया है।
भारत का 11,098 किलोमीटर लंबा तट और विशाल Exclusive Economic Zone (EEZ) समुद्र विज्ञान और संसाधन प्राप्ति में देश को विशिष्ट लाभ देते हैं ।

इसे भी पढ़ें- Vision Problem in Astronauts: लम्बे समय तक स्पेस में रहने से एस्ट्रोनॉट्स की आँखों पर पड़ रहा नकारात्मक प्रभाव।
3. संसाधन निष्कर्षण एवं नीले अर्थव्यवस्था की सम्भावना
Ocean Mission के तहत, भारत polymetallic nodules (जिनमें मैंगनीज, निकल, कोबाल्ट, तांबा आदि होते हैं) के अध्ययन, निष्कर्षण और महासागर तलभूमि की खोज पर कार्य कर रहा है।
भारत को International Seabed Authority से एक क्षेत्र आवंटित किया गया है जिसमें लगभग 380 मिलियन टन polymetallic nodules पाए जाते हैं । यह खनिज भंडार इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, बैटरी और अन्य आधुनिक उद्योगों के लिए महत्वपूर्ण है।
4. Matsya-6000 की प्रगति
ISRO और NIOT द्वारा Matsya-6000 उपसतहयान का विकास किया जा रहा है, जिसमें 80 mm मोटाई का टाइटेनियम एलॉय शरीर (sphere) और 2.1 मीटर व्यास है, जो लगभग 600 बार के दबाव (pressure) को सहन कर सकता है ।
जुलाई 2025 में, यह मिशन ISRO द्वारा 700 वेल्ड परीक्षणों के बाद इस उपसतहयान के personnel sphere के वेल्डिंग में सफलता प्राप्त की गई—जो इस मिशन की तकनीकी जटिलता को दर्शाता है ।
अब Matsya-6000 का लक्ष्य है 2026 में shallow-water trials, और 2027 तक गहरा मानवरहित (unmanned) और फिर मानवयुक्त मिशन सम्पन्न करना ।

भारत के इस 5,002 मीटर की समुद्री गहराई (Indian in the Ocean) में मानवयुक्त गोता को मील का पत्थर माना जा सकता है। यह सिर्फ तकनीकी सफलता नहीं बल्कि एक राष्ट्रीय दृष्टिकोण और वैज्ञानिक क्षमता का परिचायक है।
यह सफलता Samudrayaan मिशन की ग्रामीण तैयारियों को मजबूत करती है, जिससे Matsya-6000 की मानवयुक्त गहरी गोता क्षमता सुनिश्चित की जा सकेगी।
साथ ही, नीली अर्थव्यवस्था और महासागरीय संसाधनों के कार्यान्वयन में नयी दिशाएँ खुल रही हैं।
यदि यह मिशन सफल होता है, तो भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल होगा, जिसने गहरी समुद्री मानव मिशन क्षमता विकसित की है, जिसका प्रभाव आर्थिक, वैज्ञानिक और वैश्विक दृष्टिकोण से होता है।